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मेरी तरह आप भी शायद भारत के सबसे प्रिय पाँच बार के विश्व विजेता विश्वनाथन आनंद को विश्व चैंपियनशिप में नहीं पाकर बहुत याद कर रहे होंगे । वो भले पिछले एक दशक में पहली बार विश्व चैंपियनशिप का हिस्सा ना हो पर अभी भी वह खेल के मामले में विश्व के सबसे शीर्ष खिलाड़ियों में से एक है । अमरीका के सेंट लुईस चैस क्लब इस्कोलास्टिक सेंटर में चल रही चैम्पियन शोडाउन टूर्नामेंट को भारत के इस 47 वर्षीय दिग्गज नें युवा और बेहद प्रतिभाशाली विश्व नंबर 3 फबियानों करूआना , विश्व नंबर 7 हिकारु नाकामुरा को पीछे छोड़ते हुए जीत लिया है । 24 मैच खेलकर भी यह खिताब अपने नाम करने वाले आनंद के लिए कहना ही होगा की उम्र उनके लिए सिर्फ एक नंबर है आनंद नें अपने तीनों प्रतिद्वंदियों को किसी ना किसी फॉर्मेट में पराजित किया देखे यह पूरी रिपोर्ट आप निश्चित तौर पर गर्व से भर जाएंगे और कह उठेंगे ! वाह !! आनंद वाह !!
एक योद्धा कभी हमला करना , प्रयास करना नहीं छोड़ता भले ही उसके सामने जीत की संभावना नहीं के बराबर हो न्यू यॉर्क अमेरिका में चल रही अगोन फीडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप में एक दिन के विश्राम के बाद तीसरे राउंड में सफ़ेद मोहरो से खेल रहे मौजूदा विश्व चैम्पियन कार्लसन नें रूस के कर्जाकिन के खिलाफ लगभग बराबर चल रहे मैच में पहले तो शानदार चालें चलते हुए कर्जाकिन पर दबाव बनाते हुए गलतियाँ करने पर विवश कर दिया और एक अतिरिक्त मोहरा मारते हुए बढ़त बना ली और जब ऐसा लगने लगा की शायद अब कार्लसन ये मैच जीत लेंगे उनसे कुछ गलत चाले हुई और परिणाम स्वरूप कर्जाकिन नें जबरजस्त बचाव करते हुए गेम को बराबरी पर रोक लिया । यह देखने के लिहाज से भले एक ओर ड्रॉ नजर आए पर विश्व चैम्पियन नार्वे के मेगनस कार्लसन का एक मोहरा ज्यादा होते हुए भी मैच का ना जीत पाना कोई साधारण घटना नहीं थी
जब आप खराब लय से जूझ रहे हो और आपके परिणाम आपकी अपेक्षा से लगातार उलट आ रहे हो ऐसे समय में ही एक अच्छा खिलाड़ी उम्मीद न छोड़ते हुए जोरदार वापसी करता है । इस बार हमारे सामने उदाहरण प्रस्तुत किया है भारत की लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय महिला शतरंज विजेता बनी इंटरनेशनल मास्टर पदमिनी राऊत नें । भारत की इस युवा प्रतिभा के लिए पिछले कुछ समय से परिणाम उलट आ रहे थे । पिछले नॉर्वे ओलंपियाड में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पदमिनी इस वर्ष हुए ओलंपियाड में अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी थी और चीन में हुई लीग में भी उन्हे काफी रेटिंग का नुकसान उठाना पड़ा था । पर भारत की साहसी बेटी नें पुनः राष्ट्रीय विजेता बनकर सभी के सामने एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया , बधाई और शुभकामनाए पदमिनी आप भारत का नाम विश्व पटल पर रोशन करती रहें !!
25 अक्टूबर 2013 की बात है रात को तकरीबन 2 बज रहे थे । मैंने कुछ उम्मीद के साथ यूं ही चैस बेस की मुख्य वेब पेज को खोला और मेरी खुशी का ठिकाना ही ना रहा पहली बार हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय शतरंज वैबसाइट में प्रकाशित किया गया था वह मेरे लिए बेहद ही खास लम्हा था मुझे खुद को अभिव्यक्त करने का कुछ माध्यम मिल गया था , यह शायद वैसी ही खुशी ही जैसे कोई छोटा बच्चा बोलना सीख जाता है मतलब अपनी बात अपने घर वालों से कह सकता है कुछ घंटो पहले ही मेरे दिमाग में एक विचार आया था क्या हिन्दी में शतरंज के बारे में लेख लिखे जा सकते है और मात्र कुछ ही घंटो में चैस बेस के संस्थापक फ़्रेडरिक फ्रीडेल ने मेरे सपने को सच कर दिया था ! यह एक रोमांचक लम्हा था मेरे जीवन का पढे हिन्दी का ये सफर
न्यू यॉर्क अमेरिका में चल रही अगोन फीडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप में दूसरे राउंड में सफ़ेद मोहरो से खेल रहे रूस के कर्जाकिन और विश्व चैम्पियन नार्वे के मेगनस कार्लसन के बीच खेला गया दूसरा मुक़ाबला भी ड्रॉ रहा है । राय लोपेज ओपनिंग में खेले गए आज के मुक़ाबले में दोनों खिलाड़ी दायरे में रहते हुए सुरक्षित खेलते नजर आए । मतलब योजना साफ है ऐसा लग रहा है जैसे अभी दोनों एक दूसरे को समझने की कोशिश में है और अंदाजा लेने की कोशिश कर रहे है की कौन कितना आत्मविश्वास से चाले चल रहा है ।आज दोनों खिलाड़ी विश्राम के समय शायद तीसरे चक्र में कुछ अलग सोच के साथ लौटे । उम्मीद है जल्द ही हमें कुछ अच्छे और मजेदार खेल देखने को मिलेंगे यह मैं नहीं कह रहा है ऐसा कहना है कर्जाकिन का ! देखते है किस करवट पहले बैठेगा ऊंट !!
मौजूदा विश्व चैम्पियन नॉर्वे के मेगनस कार्लसन और रूस के सेरजी कर्जाकिन के बीच न्यू यॉर्क में खेला गया अगोन फीडे विश्व चैंपियनशिप का पहला मुक़ाबला बराबरी पर छूटा । सफ़ेद मोहरो से खेल रहे कार्लसन नें ट्रोम्पास्की ओपेनिंग खेलते हुए एक प्रकार से 2013 की अपनी रणनीति जारी रखी मतलब साफ है वो कर्जाकिन को भी उनकी ओपनिंग थ्योरी की तैयारी से बाहर रखना चाहते है , हालांकि विश्व के सबसे बेहतर रक्षात्मक खिलाड़ी माने जाने वाले कर्जाकिन नें बेहद संतुलित खेल दिखाते हुए खेल को कभी भी कार्लसन के लिए बेहतर नहीं होने दिया उन्होने खेल पर अपनी बेहतर समझ दिखाते हुए अपने शुरुआती मैच में ही सही समय में सही चाले चली ।तो कुल मिलाकर यह मैच काले मोहरो से खेल रहे कर्जाकिन के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त दे गया पर याद रहे विश्व चैम्पियन बनने के लिए आपको पूरा अंक चाहिए होता है ! जो जीतेगा वही होगा सिकंदर !!
हिन्दी में शतरंज के लेख लिखने का सफर 2013 की आनंद - कार्लसन के बीच हुई फीडे विश्व चैंपियनशिप चेन्नई , भारत से हुआ था फिर 2014 रूस में हुए इन्ही दिग्गजों के बीच हुए महामुकाबले में पुनः हिन्दी के लेख को चेसबेस इंटरनेशनल के लेखो में जगह मिली और इस दौरान हमें विश्व भर से हिन्दी को समझने वाले पाठको ने अपने संदेश भेजे और फिर हिन्दी भाषा में शतरंज के विकास को ध्यान में रखते हुए 2016 में चेसबेस नें अलग से एक हिन्दी पेज शुरू करने का फैसला लिया और आप सबके प्यार की बदौलत हम धीरे धीरे सिर्फ हिन्दी समझने वाले लोगो तक भी खेल की सही जानकारी पहुंचा पा रहे । आज से शुरू हो रही विश्व चैंपियनशिप में इतिहास के सबसे युवा विश्व चैम्पियन मेगनस कार्लसन और इतिहास के सबसे युवा ग्रांड मास्टर कर्जाकिन आपस में मुक़ाबला खेलेंगे कौन जीतेगा यह तो भविष्य ही बताएगा पर इस दौरान आप हिन्दी पेज में इस विश्व चैंपियनशिप से जुड़ी हर खास बात का आनंद ले सकेंगे ।
महाराष्ट्र राज्य यूं ही नहीं इस समय शतरंज के लिए भारत से लेकर दुनिया भर में जाना जा रहा है । कारण है वहाँ होने वाले आयु वर्ग राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का स्तर भी काफी ऊंचा होता है और यही कारण है की महाराष्ट्र 15 वर्ष आयु समूह का अमरावती में होने वाला मैच एक अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग टूर्नामेंट भी है । ग्रांड मास्टर स्वप्निल धोपाड़े , इंटरनेशनल मास्टर अनूप देशमुख और दिग्गज पवन डुडेजा जैसे शतरंज खिलाड़ियों का यह शहर महाराष्ट्र शतरंज में एक विशेष स्थान रखता है । साथ ही प्रसिद्ध अंबादेवी मंदिर ,मेलघाट टाइगर रिजर्व का भ्रमण आपके बच्चो के इस खेल कार्यक्रम को यादगार बना सकता है । तो अगर आप महाराष्ट्र के निवासी है तो 15 वर्ष तक के अपने बच्चे के लिए यह आयोजन एक शानदार टूर्नामेंट साबित होगा । पढे पूरी जानकारी
नेशनल प्रीमियर खेलना हर शतरंज खिलाड़ी का सपना होता है और इसे जीतना एक बहुत बड़ा सम्मान भारत की राजधानी दिल्ली में शतरंज संघ के शानदार इंतज़ामों के साथ पंजाब भवन में चल रही देश की शीर्ष महिला खिलाड़ियों के बीच 43वीं नेशनल प्रीमियर शतरंज में देश की 12 चुनिंदा शतरंज खिलाड़ी अपने इन्ही सपनों के सच होने का आनंद उठा रही है जी हाँ शतरंज का ये महा मुक़ाबला एक उत्सव है तो है जंहा कोई विजेता बनने की चाह में है तो कोई बेहतर करने की राह में है , कोई खुद को सर्वश्रेस्ठ साबित करना चाहता है तो कोई अपनी उम्मीद से भी बेहतर कर रहा है । तीसरे राउंड के मुक़ाबले के बाद एयर इंडिया की एस विजयालक्ष्मी और पीएसपीबी की पदमिनी राऊत नें 2.5 बनाते हुए प्रारम्भिक बढ़त बना ली है । सौम्या , निशा , ईशा और बाला कनम्मा 2 अंक बनाकर सयुंक्त दूसरे स्थान पर चल रही है । पढे तीन राउंड के बाद का यह लेख ..
आयोजको नें सारे इंतजाम कर दिये है ,मोहरे और खिलाड़ी भी तैयार है बस इंतजार है पहले राउंड के समय के आने का और इसके साथ ही भारत की सर्वश्रेस्ठ महिला खिलाड़ियों के बीच जोरदार टक्कर के साथ आगाज होगा 43वीं नेशनल प्रिमियर महिला शतरंज प्रतियोगिता का और अगले 12 दिनो में हमे पता लग जाएगा कौन सी महिला खिलाड़ी होगी इस वर्ष की राष्ट्रीय विजेता । भारत की चुनिन्दा शीर्ष 12 महिला खिलाड़ी आपस में राउंड रॉबिन पद्धति से 11 राउंड खेलेंगी । हर किसी का मुक़ाबला हर किसी से होगा और यही बात यह तय करेगी की सबसे बेहतर और मजबूत कौन है । दिल्ली के पंजाब भवन में कल शाम को खिलाड़ियों की बैठक के बाद उनके बीच मैच के ड्रा भी निकले गए और आज दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर पहले चक्र का आगाज होगा । चेसबेस इंडिया आपके लिए इस पूरे टूर्नामेंट के उतार चढ़ाव का हर लम्हा आपके सामने लाता रहेगा । सभी खिलाड़ियों को बेहतर अच्छे और खेल भावना से भरे हुए खेल खेलने की शुभकामनाए
बेतुमी ,(जॉर्जिया) दीपावली के दिन सिर्फ हाँकी ही नहीं शतरंज से भी भारत को पदको का तोहफा मिला और बड़ी बात ये की यहाँ से तोहफा छोटे छोटे नन्हें मुन्नो ने दिलाया । पिछले 12 दिनो से चल रहे मुकाबलों में अंततः भारत अपनी छाप छोड़ने में सफल रहा पर निश्चित तौर पर दुनिया की नजर अब भारतीय खिलाड़ियों पर होती है ऐसे में हमें अपनी तैयारी और बेहतर करने की जरूरत है । मुख्य तौर पर 8 वर्ष से लेकर 16 वर्ष तक के समूह में होने वाली विश्व स्पर्धाओं को खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या के कारण विश्व शतरंज संघ द्वारा इसे इस वर्ष से 8 और 12 वर्ष आयु वर्ग में विश्व केडेट स्पर्धा के रूप में एक नया नाम दिया गया । दुनिया भर के 66 देशो के 722 नन्हें सितारे इस विश्व स्पर्धा में भाग लेने बेतुमी में एकत्र हुए । भारत नें इस बार 28 नन्हें बच्चे कुल छह आयु वर्ग में प्रतियोगिता में उतारे थे और उतार चढ़ाव भरी रही इस प्रतियोगिता में अंततः भारत नें कुल 18 पदको में से चार पदक अपने नाम किए हालांकि स्वर्ण पदक की कमी के चलते भारत पदक तालिका में अमेरिका ,रूस ,तुर्कमेनिस्तान और कजाकिस्तान के बाद पांचवे स्थान पर रहा पर एक रजत और तीन कांस्य जीतकर भारतीय टीम नें भारत के तिरंगे को समूचे विश्व के सामने सम्मानित करते हुए ही अपना विश्व केडेट का सफर पूरा किया ।
विश्व शतरंज में भारत के बढ़ते प्रभाव पर दुनिया भर में लेख लिखे जा रहे है ,शीर्ष स्तर पर हमारे देश के खिलाड़ी नित नए आयाम स्थापित कर रहे है हरिकृष्णा , विदित ,अधिबन ,सेथुरमन,हरिका ,हम्पी ,अभिजीत और ऐसे अनगिनत सितारे पिछले एक दशक में विश्व यूथ जैसी स्पर्धाओ से निकल कर विश्व पटल पर छा गए है । अखिल भारतीय शतरंज संघ के द्वारा खड़ा किया गया देश में शतरंज का विकास क्रम दुनिया भर में सराहा गया है । पर इस बीच पहली बार आयोजित हुई विश्व केडेट स्पर्धा में भारत का प्रदर्शन उतना प्रभावशाली नहीं हो पा रहा था की दसवे राउंड में भारत के लिए एक बड़ा झटका लगा है भारत की पदक की उम्मीद नजर आ रहे बालक वर्ग में प्रग्गानंधा और निहाल इसी तरह बालिका वर्ग में मृदुल और दिव्या को आपस में मुक़ाबला खेलना होगा ऐसे में ड्रॉ जहां मेडल की उम्मीद धूमिल कर सकता है तो जीत -हार किसी एक को पदक की दौड़ से बाहर । खैर उम्मीद है अंत में भारत के खाते में पदक जरूर आएंगे पर तब तक तो यही कहना होगा .. ऐ दिल है मुश्किल ..
शतरंज की तरह एक और खेल भारत में जन्मा जिसमें भारत की मिट्टी की ताकत भी है । हमारे देश में आज के इस क्रिकेटमयी युग में जंहा क्रिकेट के विश्व कप जीतने पर हम सब सड़कों पर निकलकर डांस करने लगते है आतिशबाज़ी करने लगते है कबड्डी में भारत का विश्व कप जीतना शायद उतनी बड़ी खबर ना समझी जाए पर कल रात जब मैंने हमारे देश में जन्मे इस खेल के फ़ाइनल मुक़ाबले में भारत को ईरान से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए देखा तो मन गर्व से भर उठा , देखा तो लगा शायद फुटबाल की तरह की फुर्ती ,बैडमिंटन की तरह की तेजी ,शतरंज की तरह बुद्धिमानी और एकाग्रता ,कुश्ती की तरह दांव लगाने की महारत और किसी भी अन्य खेल की तरह वापसी करने की क्षमता इस खेल में समाई हुई है और इसे खेलना जंहा काफी रोचक है तो इसे खेलने वालों की मेहनत किसी अन्य खेल के खिलाड़ी से ज्यादा ही मालूम पड़ती है । खैर भारत की कबड्डी टीम नें लगातार तीसरी बार कबड्डी का विश्व कप जीत लिया है और इससे पहले भारत एशियन खेलो में लगातार 7 स्वर्ण पदक जीत चुका है ! विश्व भर से प्रतिनिधित्व कर रही विभिन्न देशो की टीमों के बीच भारत की विश्व विजयी टीम को बधाई !!
भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा विश्व शतरंज में बढ़ रहा है यह बात यूं ही नहीं कही जा रही दरअसल पिछले कुछ समय में या यूं कहे पिछले कुछ सालो में भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिभागिता भारत के बाहर के टूर्नामेंट में तेजी से बढ़ी है । परिणाम स्वरूप खिलाड़ियों को भरपूर मौके मिल रहे है अपनी प्रतिभा दिखाने के। होगेवीन ,नीदरलैंड में चल रहे 20वें होगेवीन ग्रांड मास्टर टूर्नामेंट में भारत के खिलाड़ियों नें शुरुआत से ही दबदबा रखा है और सात राउंड के बाद क्या आप यकीन करेंगे सात भारतीय खिलाड़ी शीर्ष 10 में शामिल है ! भारत के ग्रांड मास्टर अभिजीत गुप्ता और रोहित ललित बाबू 6.5 अंक बनाकर +2800 का प्रदर्शन कर रहे है और उनसे पूरे एक अंक पीछे तीसरे स्थान पर भी भारतीय ग्रांड मास्टर संदीपन चंदा है । प्रतियोगिता में भारत की एकमात्र महिला खिलाड़ी ईशा करवाड़े भी 5 अंक बनाकर चौथे स्थान पर है तो युवा राकेश जेना ग्रांड मास्टर नोर्म के करीब है ,आखिर भारत के लिहाज से एक प्रतियोगिता से हम इससे ज्यादा क्या उम्मीद कर सकते है ..पढे यह लेख